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Friday, 18 March 2016

सशक्त नारी सफल समाज

गूँज रहा है नारा आज
सशक्त नारी सफल समाज

ब्रह्म्मा को रचनी थी श्रष्टि /ठहर गई नारी पर् दृष्टि
तन मन रचा अलौकिक रूप/होने लगी खुशी की वृष्टि
सत्यम शिवम सुन्दरं राज़
गूँज रहा है नारा आज

नारी बिना ना नर की पूछ /वन्श्वेली बिन दुन्या छूँछ
मत पिता जब रचते सृष्टि/तब दुनिया की हिलती पूँछ
नया सृजन देता आवाज़
गूँज रहा है नारा आज

कोई सा भी हो मैदान /नारी की अपनी पहचान
जहाँ ज़रूरत सबसे पहले /रखे हथेली अपनी जान
नव अभियान करे आगाज़/
गूँज रहा है नारा आज

ऐसी नहीं है कोई युक्ति /नारी की झुटला दे शक्ति
ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश /माँ की करते हैं सब भक्ति
माँ दुनिया में है सरताज़
गूँज रहा है नारा आज

Friday, 2 August 2013

चमत्कार

                       चमत्कार
वैश्वीकरण
उदार बजरिया 
बदल रहा है जगत नजरिया

नंग धड्न्गें जो रह करके
जंगल जंगल रहे भटकते
 नून तेल लकड़ी चक्कर में
रहे रात दिन पैर पटकते
भावी पीढ़ी
चन्दा पर जा
निज परचम फहराय जबरिया …

जितने चतुर हुए मछुयारे
उनसे ज्यादा चतुर मछरियाँ
जहा कहीं भी जाल बिछे हों
सपनेहूँ ना गिनें ड गरियाँ
अब लगता है
बिलकुल ऐसा
 दिल दिमाग की खुली किवरिया

चलता है सब उलटा पुलटा
शाश्वत सत्य लगें सब झूठे
पुरखे यदि आकर करके परखें
लगें नियम सब थोंथे ठूँठे
चकाचौंध हों
फिर यह सोचे
चमत्कार कर रहा सवरिया
[भोपाल :०१ . ०८ . २०१३ ]

Thursday, 3 May 2012

जूनी नाव



जूनी नाव बुने सन्नाटा
कहती करूनं कहानी     
दुल्हन सी थी नई नवेली 
सुख सपनों की रानी 
नाचा करती थी लहरों से 
मीरा सी दीवानी 
भूले नहीं भूलती उसकी 
तन मन भरी रवानी 
जीवन रेखा थी बहुतों की
 किया न कभी बहाना
गंगा जमुना के संगम में 
सहजा ठौर ठिकाना 
प्रलय बाढ़ झंझावातों में
 मनु   की बुनी कहानी 
बूढ़े बरगद से ज्यों करती 
छाया सदा किनारा 
बैसे ही नाविक ने छोड़ा 
समझ उसे नाकारा 
रह रह हूक उठे अंतस में 
जग करता मनमानी
[भोपाल :05.03 2008 ] 

Tuesday, 10 April 2012

स्रष्टि सृजन सन्देश !

हाय हाय यह कैसा देश
अरे हाय कैसा परिवेश

    माँ बापू ही पीछे पड़ते
    पल पल बढ़ना मेरा पढ़ते
   पहचान हुई जैसे ही मेरी
  घुसुर पुसुर आपस में करते
बदला बदला उनका सोच
आनन से झलके अफ़सोस
    
      रहे बांस ना बजे बाँसुरी
      चल पड़ते हैं राह आसुरी
      भ्रूण ह्त्या पाप ना समझे
      खुश हों बजा बजा कर तारी
देते हैं सबको उपदेश
लड़के  की है चाह विशेष

      जैसे तैसे पैदा हौऊँ
      पड़ी पड़ी कचड़े में रौऊँ 
      बाँझ बिबस पत्थर दिल पिघले
      घर आँगन में खुशियाँ बौऊँ 
रचूँ नया इतिहास अशेष
स्रष्टि सृजन बांटूं सन्देश
[भोपाल ०८.०४.२०१२]  


Wednesday, 29 February 2012

होली त्योहार

                                         होली का त्योहार
जो
लाये त्योहार
वो
होली त्योहार
वन उपवन में बौर
महक उठे हर ठौर
फागुन  फाग दौर
वसंत के सिरमौर
जो
रख दे त्योहार ...

रंग बिरंगे रंग
जन गण मन के संग
सबमें भरे उमंग
बरसाने मानिंद
जो
मनता त्योहार ...

लिखे  परीक्षा छंद
बचपन हो स्वच्छंद 
खेलकूद अनुबंध
रेशम से सम्बन्ध 
जो
रच दे  त्योहार
बो
होली त्योहार
[भरूच:०१.०३.२००२]