Saturday, 9 April 2016
पहली उड़ान डॉक्टर आनन्द का बाल गीत सफर कर चुके बच्चे सोचे /मज़ा गज़ब का आया वायुयान का चालक बनना /कुछ के मन को भाया हँसी खुशी से माम डेड को/उसने यह बतलाया पहली उड़ान मुझे उड़ाना/साफ साफ़ समझाया " भरी खचाखच हो बच्चों से /जग की सैर कराऊँ हँसी खुशी से याद करें जो/ ऐसा सबक सिखाऊँ जो बच्चा जो कुछ भी मांगे /उसको बही खिलाऊँ सबको हँसते खिलते देखूं /गंगा नीर पिलाऊँ सब बच्चों को गले मिलें /ऐसा पाठ पढाएं जस माटी में खेले कूदे /उसका मान बढ़ाएँ [अमरीका :हयूस्टन :०८.०८.२०११]
Friday, 18 March 2016
सशक्त नारी सफल समाज
गूँज रहा है नारा आज
सशक्त नारी सफल समाज
ब्रह्म्मा को रचनी थी श्रष्टि /ठहर गई नारी पर् दृष्टि
तन मन रचा अलौकिक रूप/होने लगी खुशी की वृष्टि
सत्यम शिवम सुन्दरं राज़
गूँज रहा है नारा आज
नारी बिना ना नर की पूछ /वन्श्वेली बिन दुन्या छूँछ
मत पिता जब रचते सृष्टि/तब दुनिया की हिलती पूँछ
नया सृजन देता आवाज़
गूँज रहा है नारा आज
कोई सा भी हो मैदान /नारी की अपनी पहचान
जहाँ ज़रूरत सबसे पहले /रखे हथेली अपनी जान
नव अभियान करे आगाज़/
गूँज रहा है नारा आज
ऐसी नहीं है कोई युक्ति /नारी की झुटला दे शक्ति
ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश /माँ की करते हैं सब भक्ति
माँ दुनिया में है सरताज़
गूँज रहा है नारा आज
गूँज रहा है नारा आज
सशक्त नारी सफल समाज
ब्रह्म्मा को रचनी थी श्रष्टि /ठहर गई नारी पर् दृष्टि
तन मन रचा अलौकिक रूप/होने लगी खुशी की वृष्टि
सत्यम शिवम सुन्दरं राज़
गूँज रहा है नारा आज
नारी बिना ना नर की पूछ /वन्श्वेली बिन दुन्या छूँछ
मत पिता जब रचते सृष्टि/तब दुनिया की हिलती पूँछ
नया सृजन देता आवाज़
गूँज रहा है नारा आज
कोई सा भी हो मैदान /नारी की अपनी पहचान
जहाँ ज़रूरत सबसे पहले /रखे हथेली अपनी जान
नव अभियान करे आगाज़/
गूँज रहा है नारा आज
ऐसी नहीं है कोई युक्ति /नारी की झुटला दे शक्ति
ब्रह्मा विष्णु महेश गणेश /माँ की करते हैं सब भक्ति
माँ दुनिया में है सरताज़
गूँज रहा है नारा आज
Friday, 2 August 2013
चमत्कार
चमत्कार
वैश्वीकरण
उदार बजरिया
बदल रहा है जगत नजरिया
नंग धड्न्गें जो रह करके
जंगल जंगल रहे भटकते
नून तेल लकड़ी चक्कर में
रहे रात दिन पैर पटकते
भावी पीढ़ी
चन्दा पर जा
निज परचम फहराय जबरिया …
जितने चतुर हुए मछुयारे
उनसे ज्यादा चतुर मछरियाँ
जहा कहीं भी जाल बिछे हों
सपनेहूँ ना गिनें ड गरियाँ
अब लगता है
बिलकुल ऐसा
दिल दिमाग की खुली किवरिया
चलता है सब उलटा पुलटा
शाश्वत सत्य लगें सब झूठे
पुरखे यदि आकर करके परखें
लगें नियम सब थोंथे ठूँठे
चकाचौंध हों
फिर यह सोचे
चमत्कार कर रहा सवरिया
[भोपाल :०१ . ०८ . २०१३ ]
वैश्वीकरण
उदार बजरिया
बदल रहा है जगत नजरिया
नंग धड्न्गें जो रह करके
जंगल जंगल रहे भटकते
नून तेल लकड़ी चक्कर में
रहे रात दिन पैर पटकते
भावी पीढ़ी
चन्दा पर जा
निज परचम फहराय जबरिया …
जितने चतुर हुए मछुयारे
उनसे ज्यादा चतुर मछरियाँ
जहा कहीं भी जाल बिछे हों
सपनेहूँ ना गिनें ड गरियाँ
अब लगता है
बिलकुल ऐसा
दिल दिमाग की खुली किवरिया
चलता है सब उलटा पुलटा
शाश्वत सत्य लगें सब झूठे
पुरखे यदि आकर करके परखें
लगें नियम सब थोंथे ठूँठे
चकाचौंध हों
फिर यह सोचे
चमत्कार कर रहा सवरिया
[भोपाल :०१ . ०८ . २०१३ ]
Thursday, 3 May 2012
जूनी नाव
जूनी नाव बुने सन्नाटा
कहती करूनं कहानी
दुल्हन सी थी नई नवेली
सुख सपनों की रानी
नाचा करती थी लहरों से
मीरा सी दीवानी
भूले नहीं भूलती उसकी
तन मन भरी रवानी
जीवन रेखा थी बहुतों की
किया न कभी बहाना
गंगा जमुना के संगम में
गंगा जमुना के संगम में
सहजा ठौर ठिकाना
प्रलय बाढ़ झंझावातों में
मनु की बुनी कहानी
मनु की बुनी कहानी
बूढ़े बरगद से ज्यों करती
छाया सदा किनारा
बैसे ही नाविक ने छोड़ा
समझ उसे नाकारा
रह रह हूक उठे अंतस में
जग करता मनमानी
[भोपाल :05.03 2008 ]
Tuesday, 10 April 2012
स्रष्टि सृजन सन्देश !
हाय हाय यह कैसा देश
अरे हाय कैसा परिवेश
माँ बापू ही पीछे पड़ते
पल पल बढ़ना मेरा पढ़ते
पहचान हुई जैसे ही मेरी
घुसुर पुसुर आपस में करते
बदला बदला उनका सोच
आनन से झलके अफ़सोस
रहे बांस ना बजे बाँसुरी
चल पड़ते हैं राह आसुरी
भ्रूण ह्त्या पाप ना समझे
खुश हों बजा बजा कर तारी
देते हैं सबको उपदेश
लड़के की है चाह विशेष
जैसे तैसे पैदा हौऊँ
पड़ी पड़ी कचड़े में रौऊँ
बाँझ बिबस पत्थर दिल पिघले
घर आँगन में खुशियाँ बौऊँ
रचूँ नया इतिहास अशेष
स्रष्टि सृजन बांटूं सन्देश
[भोपाल ०८.०४.२०१२]
Wednesday, 29 February 2012
होली त्योहार
होली का त्योहार
जो
लाये त्योहार
वो
होली त्योहार
वन उपवन में बौर
महक उठे हर ठौर
फागुन फाग दौर
वसंत के सिरमौर
जो
रख दे त्योहार ...
रंग बिरंगे रंग
जन गण मन के संग
सबमें भरे उमंग
बरसाने मानिंद
जो
मनता त्योहार ...
लिखे परीक्षा छंद
बचपन हो स्वच्छंद
खेलकूद अनुबंध
रेशम से सम्बन्ध
जो
रच दे त्योहार
बो
होली त्योहार
[भरूच:०१.०३.२००२]
जो
लाये त्योहार
वो
होली त्योहार
वन उपवन में बौर
महक उठे हर ठौर
फागुन फाग दौर
वसंत के सिरमौर
जो
रख दे त्योहार ...
रंग बिरंगे रंग
जन गण मन के संग
सबमें भरे उमंग
बरसाने मानिंद
जो
मनता त्योहार ...
लिखे परीक्षा छंद
बचपन हो स्वच्छंद
खेलकूद अनुबंध
रेशम से सम्बन्ध
जो
रच दे त्योहार
बो
होली त्योहार
[भरूच:०१.०३.२००२]
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